Physical Address
304 North Cardinal St.
Dorchester Center, MA 02124
Physical Address
304 North Cardinal St.
Dorchester Center, MA 02124


अगर आप शेयर मार्केट में नए हैं और समझना चाहते हैं कि शेयर मार्केट क्या है और कैसे काम करता है और लोग इसमें पैसे कैसे कमाते हैं — तो यह आर्टिकल आपके लिए है। शेयर मार्केट सुनने में भले ही बड़ा और मुश्किल लगे, लेकिन इसकी बेसिक समझ बहुत आसान है। यहाँ कंपनियाँ अपने शेयर बेचती हैं और लोग उन शेयरों को खरीदते हैं। इसी खरीद–फरोख्त से शेयर की कीमत ऊपर–नीचे होती रहती है।
इस आर्टिकल में हम बिल्कुल सरल भाषा में शेयर मार्केट की पूरी नींव समझेंगे ताकि आगे चलकर आप निवेश करने के लिए तैयार हो सकें। और हाँ—अगर भविष्य में शेयर मार्केट के नियमों या प्रक्रियाओं में कोई बदलाव आता है तो हम इस आर्टिकल को तुरंत अपडेट करेंगे, ताकि यह हमेशा आपके लिए फ्रेश और उपयोगी बना रहे। यह एक BEGINNER TO EXPERT COMPLETE GUIDE है।
अगर आप पहली बार शेयर मार्केट सीख रहे हैं, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इस गाइड को पढ़ने के बाद आप आसानी से समझ जाएंगे कि शेयर कैसे खरीदे–बेचे जाते हैं ।

जब आप “शेयर मार्केट” शब्द सुनते हो, तो इसमें मार्केट आता है — यानी एक बाजार । जैसे सब्ज़ी का बाजार होता है, कपड़ों का बाजार होता है… उसी तरह शेयर मार्केट एक ऐसा बहुत बड़ा बाजार है जहाँ शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं।
इंडिया में दो सबसे बड़े शेयर मार्केट है –
BSE (BOMBAY STOCK EXCHANGE)
NSE (NATIONAL STOCK EXCHANGE)
ये दो सबसे बड़े शेयर मार्केट में शेयर खरीदे ओर बेचें जाते है । या आप कुछ इस प्रकार समझ सकते हो कि इन दो बड़े शेयर मार्केट की वजह से हम मोबाइल या लैपटॉप से किसी भी शेयर बेचने वाली कंपनी के शेयर खरीद पाते हैं अब शायद आप समझ गए होंगे की शेयर मार्केट क्या है।
शेयर यानी किसी कंपनी का छोटा-सा हिस्सा।
जैसे एक बड़ी कंपनी को आप छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दो और उन टुकड़ों को लोग खरीद सकें — वही शेयर होता है।
जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते है,
तो आप उस कंपनी के छोटे से पार्टनर बन जाते हो।
कंपनी जितनी बढ़ेगी, आपका पैसा भी उतना ही बढ़ेगा।
शेयर मार्केट में रोज़ लाखों लोग यही करते हैं —
कंपनी के हिस्से खरीदते भी हैं और बेचते भी हैं।
शेयर मार्केट में आपके पैसे की पूरी गारंटी कोई नहीं लेता है इसलिए कुछ ब्रोकर ऐप कहते है की – “INVESTMENTS IN SECURITIES MARKET ARE SUBJECT TO MARKET RISKS. READ ALL THE RELATED DOCUMENTS CAREFULLY BEFORE INVESTING.”
लेकिन इसका मतलब यह नहीं होता कि शेयर मार्केट सुरक्षित नहीं है। बल्कि SEBI पूरे शेयर मार्केट की निगरानी करता है ताकि पैसों से रिलेटेड कोई फ्रॉड ना हो और हर एक कंपनी नियमों का पालन करें ।
जब किसी भी कंपनी को पैसे की आवश्यकता पड़ती । जैसे कुछ नई टेक्नोलॉजी बनाने या मशीन खरीदने के लिए तब कंपनी के पास दो रास्ते होते हैं –
पहला – या तो कंपनी बैंक से बड़ा सा लोन ले
दूसरा – या फिर IPO के जरिए लोगो को अपना ( हिस्सा ) यानी शेयर बेचें
लेकिन जब कंपनी बैंक से बड़ा सा लोन लेती है तो कंपनी को उस लिए गए लोन पर ब्याज देना पड़ता है इसलिए कंपनी लोगों को अपने शेयर बेंचती है जिस पर उसे कोई ब्याज नहीं देना पड़ता ।
जब कोई भी कंपनी पहली बार अपने शेयर आम लोगों को बेचती है तो उसे IPO – ( INITIAL PUBLIC OFFERING ) कहा जाता है।
क्योंकि यह पहली बार हो रहा होता है, इसलिए इसे INITIAL (पहली बार) PUBLIC (लोगों को) OFFERING (शेयर बेचना) कहा जाता है। — यानी पहली बार जनता को शेयर ऑफर करना या बेचना।
लोग शेयर इस लिए खरीदते है कि क्योंकि शेयर खरीदने पर पैसे बढ़ते हैं वो भी दो तरीकों से –
शेयर की कीमत बढ़ाने में –
मान लो कोई कंपनी है उसके शेयर की कीमत अभी ₹50 है । कुछ दिनों या हफ्तों के बाद उस कंपनी के शेयर की कीमत ₹75 या ₹100 हो जाता मतलब आपका ₹50 बड़ जाता है ।
डिविडेंड मिलने से –
जब कोई कंपनी का अच्छा प्रॉफिट होता है तो कंपनी उस प्रॉफिट का थोड़ा हिस्सा अपने शेयर रखने वाले (शेयर होल्डर ) को दे देती है जिसे डिविडेंड कहा जाता है। उदाहरण –
जैसे कोई कंपनी है OP अब इसके 50 शेयर आपने खरीद रखे हैं और कंपनी को बहुत बड़ा प्रॉफिट होता है तो अब कंपनी कहगी की प्रति शेयर ₹20 डिविडेंड दे दो । तो आपको टोटल ₹50 * ₹20 =₹1000 मिलेंगे यह पैसे आपके डायरेक्ट बैंक अकाउंट में आ जाते हैं ।
जब आप किसी कंपनी का शेयर खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी के छोटे हिस्से के मालिक बन जाते हैं। शेयर की कीमत हर दिन बदलती रहती है, क्योंकि यह इस पर निर्भर करता है कि लोग उस शेयर को कितनी खरीदना चाहते हैं और कंपनी कैसी चल रही है। अगर कंपनी अच्छा काम कर रही है, तो लोग उसके शेयर खरीदना पसंद करेंगे और इसकी कीमत बढ़ेगी। लोग शेयर इसलिए खरीदते हैं ताकि बाद में इसे बेचकर मुनाफा कमा सकें। इसी तरह शेयर मार्केट काम करता है – यह कंपनियों और निवेशकों को जोड़ता है और पैसा बढ़ाने का एक मौका देता है।
शेयर मार्केट के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं
1 प्राथमिक बाजार (PRIMARY MARKET) –
यह वह मार्केट है जहाँ कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम जनता को बेचती है। इसे IPO (INITIAL PUBLIC OFFERING) कहा जाता है। उदाहरण के लिए, मान लीजिए कोई नई टेक्नोलॉजी कंपनी पहली बार अपने शेयर लोगों को बेच रही है। अगर आप इस IPO में शेयर खरीदते हैं, तो आप सीधे कंपनी से शेयर खरीद रहे हैं। तो इसे PRIMARY MARKET कहते है।
2 द्वितीयक बाजार (SECONDARY MARKET):
इसमें पहले से जारी शेयरों का लेन-देन होता है। यानी आप शेयर सीधे कंपनी से नहीं बल्कि किसी दूसरे निवेशक से खरीदते या बेचते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपने पहले किसी कंपनी के शेयर खरीदे और अब आप उन्हें किसी दोस्त को बेच रहे हैं, तो यह सेकेंडरी मार्केट में ट्रेडिंग कहलाती है। इसी तरह NSE और BSE मुख्य सेकेंडरी मार्केट हैं।
जब कोई कंपनी पहली बार IPO के तहत अपने शेयर बेचती है तो शुरुआत में वह अपने शेयर प्राइस तय करती है कंपनी अपने बिजनेस के हिसाब एनालिटिक्स के हिसाब से शेयर का प्राइस रखती है।
लेकिन IPO के बाद यानी जब कंपनी शेयर मार्केट में लिस्ट हो जाती है तब कंपनी शेयर की कीमत तय नहीं करती सिर्फ कंपनी शुरुआती में एक बार प्राइस तय करती है । चाहे वह प्राइस ₹7 रुपया ₹100 या ₹1000 रुपया क्यों न हो
फिर जब कंपनी एक बार अपना प्राइस तय कर लेती है उसके बाद प्राइस डिमांड और सप्लाई से तय होता है जैसे –
DEMAND – अगर ज्यादा लोग शेयर खरीदते है तो शेयर की प्राइस बढ़ती है ।
SUPPLY – और अगर ज्यादा लोग शेयर बेच देते हैं तो शेयर की कीमत कम हो जाती है।
उदाहरण –
जैसे एक कंपनी है VODAFONE IDEA अब वोडाफोन आइडिया को पैसे की आवश्यकता है तो वह अपने शेयर को शेयर मार्केट में लाएगी तो उस वक्त वह अपने हर एक शेयर का प्राइस तय करेगी जैसे – 11 रुपया प्रति शेयर और जब बहुत ज्यादा संख्या में लोग शेयर खरीदेंगे तो प्रत्येक शेयर की कीमत ₹15 या ₹ 14 हो सकती है । लेकिन जब वही शेयर लोग बेचने लगते हैं तो प्राइस गिरने लगता है ।
कभी-कभी शेयर की कीमत ऊपर – नीचे जाने में इनका भी हाथ होता है जैसे मार्केट की न्यूज़, कंपनी के रिज़ल्ट और अक्सर सरकार की पॉलिसी भी कीमतें बदलती हैं ।
इंडिया में शेयर मार्केट शनिवार और रविवार को बंद रहता है और सोमवार से शुक्रवार हर दिन खुला रहता है शेयर मार्केट सुबह 9 : 15 को खुलता और 3 : 30 बंद हो जाता है । और इसी समय के बीच आप शेयर को खरीद और बेंच सकते हो । ना तो आप सुबह 9 :15 से पहले शेयर खरीद सकते हो और ना हीं बेंच सकते इसी तरह 3 : 30 के बाद शेयर मार्केट बंद होने की वजह से शेयर खरीदा – बेंचा नहीं जा सकता।
शेयर मार्केट में खरीद–बिक्री सुनने में बड़ी प्रोफेशनल चीज लगती है, लेकिन सच में यह बहुत आसान है। जब भी आप अपने मोबाइल ट्रेंडिंग ऐप से “BUY” या “SELL” का बटन दबाते हो, वहां से सीधा ऑडर NSE या BSE तक पहुँच जाता है।
अब आगे क्या होता है?
शेयर मार्केट एक बड़ा सा डिजिटल बाजार है। यहाँ आपका ऑर्डर उसी व्यक्ति से मैच किया जाता है जो आपके उलट ट्रेड करना चाहता है मतलब
अगर आप शेयर खरीद रहे हो तो कोई न कोई उसे बेच रहा होता है , और अगर आप बेच रहे हो तो कोई उसे खरीदना चाहता है।
BUYER – अगर आप शेयर खरीद ते हो तो आप BUYER हो ।
SELLER – और अगर आप शेयर बेचते हो तो आप SELLER हो ।
जैसे ही BUYER और SELLER मिल जाते हैं, बस! आपका ट्रेड कुछ ही सेकंड में पूरा हो जाता है।
फिर शेयर आपके DEMAT ACCOUNT में आ जाता है, और पैसे आपके बैंक अकाउंट से कट जाते हैं। यह पूरा प्रोसेस बहुत तेजी से होता है सी वजह से शेयर की कीमतें हर सेकंड ऊपर–नीचे होती रहती हैं।
MARKET ORDER (मार्केट ऑर्डर) –
जब आप किसी शेयर को BUY या SELL करते हो तब आपको एक ऑप्शन चुनना होता है मार्केट ऑर्डर या लिमिटेड ऑर्डर । मार्केट आर्डर का मतलब यह होता है जो शेयर आप खरीद रहे हो वह उसी प्राइस में खरीदा जाएगा जो आपकी स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है लेकिन यह तभी होगा जब आप मार्केट ऑडर ऑप्शन चुन रहे हो । लेकिन यह मत भूलिए की शेयर मार्केट में कीमतें कुछ सेकंड में भी बदलती सकती है । उदाहरण –
मान लो को कोई कंपनी है MG जिसके शेयर की कीमत मार्केट में ₹50 है। अब आप उस शेयर को BUY बटन क्लिक करके खरीद ते हो। जैसे ही आप BUY बटन दबा ओगे आप के सामने मार्केट ऑर्डर और लिमिटेड आर्डर का ऑप्शन चुनने को मिलेगा । आप मार्केट ऑर्डर चुनते हो और जैसे ही आपका ऑडर लगने वाला हो और कुछ ही सेकंड में शेयर की कीमत ₹1 बढ़कर ₹51 हो गई या ₹1 घटकर ₹ 49 हो गई । तो फिर आपका ऑर्डर ₹51 या ₹49 रुपए में ही खरीदा जाएगा । यही होता है मार्केट ऑर्डर ।
लेकिन ऐसा सेकंड में कीमत बदलना कभी-कभी होता है हमेशा नहीं होता है ।
LIMIT ORDER (लिमिट ऑर्डर) –
जब आप किसी शेयर को BUY या SELL करना चाहते हो, तब आपके पास एक दूसरा ऑप्शन होता है — लिमिटेड ऑर्डर (LIMIT ORDER)।
लिमिटेड ऑर्डर का मतलब होता है आप शेयर को सिर्फ उसी प्राइस पर खरीदना या बेचना चाहते हो जो आपने खुद तय किया है। यानि मार्केट की कीमत चाहे ऊपर जाए या नीचे आए, आपका ऑर्डर सिर्फ आपकी सेट की हुई कीमत पर ही पूरा होगा।
इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि
✔ आपका पैसा कंट्रोल में रहता है
✔ आपको सही कीमत मिलती है
✔ प्राइस बढ़-घट जाए तो भी आपका ऑर्डर तभी लगेगा जब आपकी प्राइस मैच होगी
उदाहरण –
मान लो कोई कंपनी है MG, जिसके शेयर की कीमत इस समय ₹50 चल रही है। लेकिन आप चाहते हो कि यह शेयर आपको ₹48 में ही मिले, उससे ज्यादा में नहीं।
अब आप BUY बटन दबाते हो आपको दो ऑप्शन मिलते हैं: MARKET ORDER और LIMIT ORDER
→ आप LIMIT ORDER चुनते हो
→ और खरीदने की अपनी प्राइस सेट करते हो: ₹48
अब क्या होगा?
अगर शेयर की कीमत ₹50 से गिरकर ₹48 आएगी, तब ही आपका ऑर्डर अपने-आप BUY हो जाएगा
अगर शेयर ₹48 तक नहीं आता, तो आपका ऑर्डर PENDING रहेगा और खरीद नहीं होगा
यानि आपका शेयर उतनी ही कीमत पर खरीदा जाएगा, जितनी आपने सेट की है — उससे ऊपर नहीं, उससे नीचे नहीं। यही होता है लिमिट ऑर्डर ।
शेयर मार्केट को सिर्फ आम लोग नहीं चलाते बल्कि इसमें कई सारे लोग और कंपनी भी जुड़ी होती है जैसे – RETAIL INVESTORS – आप और हम जैसे साधारण लोग जो अपने मोबाइल और लैपटॉप से शेयर खरीदते और बेचते हैं ।
TRADERS – यह वह लोग होते जो रोज SHARE MARKET में शेयर खरीदते और बेचते हैं और अपना मुनाफा कमाते है।
FII (FOREIGN INSTITUTIONAL INVESTORS) – FII विदेशी कंपनियां होती है जो भारत के शेयर पर काफी ज्यादा पैसे लगाती है
DII (DOMESTIC INSTITUTIONAL INVESTORS) – DII भारत की बड़ी-बड़ी संस्थाएं होती है म्युचुअल फंड , इंश्योरेंस कंपनियां इनकी वजह से मार्केट का परफॉर्मेंस बेहतर रहता है ।
MARKET MAKERS – यह वह लोग या कंपनियां होती है जो शेयर मार्केट में BUYER और SELLER को मिलने का काम करते है यानी जब आप कोई शेयर खरीदना चाहते हैं और कोई उसे बेच रहा होता है, तो ये मार्केट मेकर्स उन्हें मिलाने का काम करते हैं।
फायदे –
शेयर मार्केट में निवेश करने के कुछ फायदे और कुछ नुकसान भी होते हैं। इसके फायदे यह हैं कि आप लंबे समय में अच्छा रिटर्न कमा सकते हैं, डिविडेंड का लाभ मिलता है और चाहे तो कम पैसे से भी निवेश शुरू किया जा सकता है।
नुकसान –
लेकिन इसके नुकसान भी हैं—शेयर की कीमतें तेजी से ऊपर-नीचे होती हैं, गलत कंपनी चुनने पर नुकसान हो सकता है और अगर बिना जानकारी के निवेश किया जाए तो पैसे खोने का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए SHARE MARKET में निवेश करने से पहले अच्छी रिसर्च और सही निर्णय लेना जरूरी है।
अगर आर्टिकल आपको अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। क्या पता आपकी एक शेयर से किसी को शेयर मार्केट समझने में मदद मिल जाए 😊📲
❣️आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद❣️
